अरावली पर्वतमाला: भूगोल, प्राकृतिक भूमिका और वर्तमान परिदृश्य
अरावली पर्वतमाला: भूगोल, प्राकृतिक भूमिका और वर्तमान परिदृश्य अरावली रेंज: उत्तर भारत की प्राचीन पर्वतमाला और उसकी चुनौतियाँ अरावली रेंज भारत की सबसे प्राचीन पर्वतमाला मानी जाती है, जिसकी आयु लगभग 250 करोड़ वर्ष आँकी गई है। यह पर्वतमाला राजस्थान से शुरू होकर हरियाणा, दिल्ली और गुजरात तक लगभग 670 किलोमीटर में फैली हुई है। इतिहास और भूगर्भीय संरचना के लिहाज़ से अरावली भारत की सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहरों में से एक है। यह केवल पहाड़ों की श्रृंखला नहीं, बल्कि उत्तर भारत की धरती, जल, जंगल और पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने वाली एक जीवनदायिनी ढाल है। इसी कारण इसे अक्सर 👉 उत्तर भारत का “फेफड़ा” और “प्राकृतिक जल-भंडार” कहा जाता है। 🌍 भूगोल और प्राकृतिक महत्व अरावली रेंज का महत्व केवल इसके विस्तार में नहीं, बल्कि इसके द्वारा निभाई जाने वाली प्राकृतिक भूमिकाओं में छिपा है। 📍 अरावली रेंज की प्रमुख भूमिकाएँ : यह उत्तर-पश्चिम भारत में जलवायु संतुलन बनाए रखने में सहायक है और पश्चिमी मानसून के मार्ग को प्रभावित करती है। अरावली की चट्टानी संरचना वर्षा जल को भूमि में ...